इनके संगीत पर झूमते झूमते गिर पड़े राज कपूर

    • Author, मधु पाल
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

‘ज़िंदगी का सफ़र है' (सफ़र), ‘मुझको इस रात की तन्हाई में आवाज़ न दो’ (दिल भी तेरा हम भी तेरे), ‘कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे’ (पूरब पश्चिम) और ‘क़समे वादे प्यार -वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या’ (उपकार) जैसे दिल को छू लेने वाले गीत रचने वाले संगीतकार कल्याण वीर जी शाह की आज 87 वी जयंती हैं.

अपने बड़े भाई को याद करते हुए उनके छोटे भाई आनंद वीरजी शाह ने बीबीसी की खास बात चीत में बताया इस सगे भाई की जोड़ी के सफल गीतों का राज़.

नागिन बीन

गुजरात में कच्छ के कुंडरोडी में जन्मे मेरे बड़े भाई कल्याणजी वीरजी शाह बचपन से ही संगीतकार बनने का सपना देखा करते थे लेकिन उन्होंने किसी उस्ताद से संगीत की शिक्षा नहीं ली थी."

आनंद कहते हैं, "मुंबई में पहले कल्याण जी ने हेमंत कुमार के सहायक के तौर पर काम करना शुरू किया और फिर 1958 में आई उनकी पहली फ़िल्म "सम्राट चंद्रगुप्त" थी जिसमें कल्याणजी ने नागिन बीन बजाई थी. "

ये बीन इतनी प्रचलित हुई की हर नाग नागिन फ़िल्म में इस बीन का प्रयोग होने लगा और आज भी इस बीन का प्रयोग हर जगह होता हैं फिर वो चाहे शादी ही क्यों न हो.

सभी की राय

आनंद बताते हैं, "हमारा परिवार बहुत बड़ा था, एक कमरे और हॉल वाले घर में हम पांच भाई और उनके परिवार मिलाकर कुल 22 लोग रहा करते थे और ये संयुक्त परिवार ही था जो भाई के संगीत की प्रेरणा बना."

कल्याण जी जब भी किसी फ़िल्म के लिए काम करते थे उस फ़िल्म के कलाकार, गीतकार, अभिनेत्री, निर्माता और निर्देशक को एक कमरे में बिठा कर धुन सुनाया करते थे और उनसे उस गाने को बेहतर बनाने के लिए उनकी राय जानने की कोशिश करते थे.

आनंद खुशी से बताते हैं, "आज भी मुझे याद हैं कैसे बड़े भाई, मुकेश, किशोर और मन्ना डे मस्ती मस्ती में बेहतरीन गाने तैयार कर दिया करते थे. हम सब संगीत की एक बैठक तैयार करते थे. सभी संगीत वाद्ययंत्र के साथ खूब मौज मस्ती होती."

कल्याण जी ने जितने भी गीत मुकेश के साथ किए सभी अपने ज़माने के हिट रहे, इतना ही नहीं सबसे ज़्यादा सोलो गीत अगर लता ने गाए हैं तो वो कल्याण और आनंद के साथ ही गाए.

यादें

आनंद जी के अनुसार कल्याणजी-आनंदजी की इस जोड़ी को एक गाना बनाने के लिए कभी 10 दिन तो कभी 30 दिन तो कभी सिर्फ 5 मिनट ही लगते थे.

लता मंगेशकर चाहे कितने ही फ़िल्मों के गीत गा रही हो लेकिन जब भी कल्याण भाई लता को याद करते वो तुरंत हाज़िर हो जाती क्यूंकि लता को कल्याण भाई पर पूरा भरोसा था.

आनंद याद कर बताते हैं, "एक बार तो वो बीमारी में भी उठ कर आ गई थी फ़िल्म कोरा कागज़ के लिए जिसे उन्होंने 5 मिनट में गा दिया था."

कल्याण जी के इस गीत " मेरा पढ़ने में नहीं लागे दिल" ने लता को नेशनल अवार्ड दिलाया.

जब झूमें राज कपूर

इस संगीतकार भाई की जोड़ी के अभिनेता पृथ्वीराज कपूर, राज कपूर राजेंद्र कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन सभी से अच्छे संबंध थे.

आनंद जी बताते हैं, "सब हमारे घर आया करते थे, ढेर सारी बाते करते मस्ती होती, गाना बजाना होता."

लंदन का एक वाकया याद करते हुए आनंद जी बताते हैं कि राज कपूर जो भाई के संगीत के दीवाने थे वो एक स्टेज शो के दौरान गीत "डम डम डिगा डिगा" पर इस कदर झूमे कि स्टेज पर सच में गिर पड़े तब भाई ने उन्हें अपना हाथ देकर उठाया, इस कदर था हमारे संगीत का जादू.

सेंसर बोर्ड

सेंसर बोर्ड और बॉलीवुड का झगड़ा आज का नहीं काफ़ी पुराना है.

आनंद विराज शाह कहते हैं, "भाई जी सेंसर बोर्ड से नाराज़ तब हुए थे जब फ़िल्म 'जब जब फूल खिले' के गाने "एक था गुल और एक थी बुलबुल " के बोल के बीच 'थैंक्यू' शब्द काटना पड़ा क्यूंकि उस दौरान अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करना गलत माना जाता था."

ऐसे ही फ़िल्म छलिया के गाने "छलिया मेरा नाम, छलना मेरा काम" से हमें छलना शब्द काटना पड़ा, जिससे भाई नाराज़ हुए थे.

विरासत

कल्याणजी ने अपने फ़िल्मी करियर में लगभग 250 फ़िल्मों में संगीत दिया और उनकी आखरी फ़िल्म त्रिदेव थी.

त्रिदेव के बाद उन्होनें आनंद से कहा था, "भाई ऐसा लगता हैं संगीत का अपना ये धंधा बंद करना होगा. हमने बहुत काम कर लिया हैं और इस फ़िल्म का गीत ओये ओये बहुत चल भी रहा हैं अब देखना इस गाने के बाद कई गाने इसी प्रकार के ही आएंगे जिसमें ओए ओए और ना जाने कैसे कैसे शब्दों का इस्तेमाल होने वाला हैं."

कल्याण जी ने कहा था कि अपना ये गाना तो चल गया लेकिन आगे ऐसे गानो को करने में मज़ा नहीं आएगा इस लिए अब अपनी इस संगीत की दुकान को यही समाप्त करते हैं, अब नए बच्चो को मौका देते हैं!!

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