सीरिया में दबदबे को लेकर इसराइल और तुर्की भिड़े, अमेरिकी राजदूत ने नेतन्याहू पर उठाई उंगली

अर्दोआन और नेतन्याहू
इमेज कैप्शन, तुर्की एक तरफ़ नेटो का सदस्य है तो दूसरी तरफ़ इसराइल भी अमेरिका का क़रीबी सहयोगी है
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 8 मिनट

तुर्की ने कहा है कि वह इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की गिरफ़्तारी के लिए इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करने का अनुरोध करेगा.

वहीं बिन्यामिन नेतन्याहू के दफ़्तर ने इसका जवाब देते हुए कई आरोप लगाए हैं और कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप्प अर्दोआन यहूदी विरोधी हैं.

ग़ज़ा पर इसराइल के हमले के बाद अर्दोआन ने नेतन्याहू को युद्ध अपराधी कहा था. उन्होंने उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की भी मांग की थी.

तुर्की ने शुक्रवार को एक बार फिर ग़ज़ा से जुड़े एक मामले में नेतन्याहू की गिरफ़्तारी की अपील की.

दोनों देशों के बीच मंगलवार को तुर्की की सीमा के पास स्थित एक सीरियाई मिलिट्री बेस पर इसराइल के हमले बाद भी तनातनी और बढ़ गई है.

सीरियाई टीवी के मुताबिक़ मंगलवार को अबू अल-दुहूर एयरबेस के रनवे और एक स्टोरेज सेंटर पर आठ हवाई हमले किए गए थे.

इसराइल ने सीरिया पर आरोप लगाया था कि वह तुर्की के सैनिकों को इस एयरबेस पर तैनात होने की अनुमति दे रहा था.

सीरिया और तुर्की ने इन हमलों के लिए इसराइली सेना को ज़िम्मेदार ठहराया. दोनों ने कहा कि इस तरह के हमलों से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
दिनभर
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

तुर्की में अमेरिका के राजदूत टॉम बराक ने इन्हें "अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला क़दम'' बताया है. उन्होंने कहा कि ये हमला क्षेत्रीय स्थिरता को आगे नहीं बढ़ाता है.''

इसराइल अमेरिका का क़रीबी सहयोगी है और तुर्की नेटो का सदस्य है. ऐसे में अगर तनातनी बढ़ती है तो अमेरिका के लिए खुलकर किसी का पक्ष लेना आसान नहीं होगा.

क्या इसराइल तुर्की से टकराने का जोखिम ले सकता है? इसका जवाब तुर्की में अमेरिका के राजदूत टॉम बराक ने इसराइली पत्रकार मारियो नवाफल के साथ बातचीत में दिया है. टॉम बराक ने कहा, ''इसराइल को ख़ुफ़िया जानकारी मिली थी कि तुर्की सीरिया के एक एयरबेस पर सैन्य साजो-सामान तैनात कर सकता है. वॉशिंगटन ने इसकी जांच की और पुष्टि की कि ऐसा नहीं हो रहा था.''

''इस आशंका के बारे में संबंधित पक्षों को जानकारी दी गई, ख़ुफ़िया इनपुट की जांच की गई और सीरिया को लगा कि इस मामले को कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाया जा रहा है. इसमें सीरिया के विदेश मंत्री और मोसाद प्रमुख के बीच क़रीब दो घंटे तक हुई बैकचैनल बातचीत भी शामिल थी. लेकिन इसके बाद भी इसराइली लड़ाकू विमान वहाँ पहुँच गए और उन्होंने वॉशिंगटन या तुर्की को सूचित किए बिना एयरबेस के रनवे पर हमला कर दिया. यहीं से यह मामला सीरिया पर इसराइल के एक और हवाई हमले से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक स्थिति में बदल गया.'

बराक ने कहा, ''तुर्की ने विमानों को अपनी ओर आते देखा. उन्हें यह पता नहीं था कि उनका मक़सद क्या है या उनका निशाना कौन है. ऐसे में तुर्की के सामने यह संभावना पैदा हो गई कि उसे अपने लड़ाकू विमान भी उड़ाने पड़ सकते हैं.''

जब राजदूत बराक से पूछा गया कि इसराइल इतना बड़ा जोखिम क्यों उठाएगा, तो उन्होंने इसके पीछे दो संभावनाएं बताईं. ''पहली, मोसाद, इसराइली सेना और नेतन्याहू के कार्यालय के बीच संवाद व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई हो. दूसरी संभावना? "इसराइल तुर्की को उकसा रहा था." मेरा अनुमान दूसरी संभावना की ओर है.''

राजदूत बराक के मुताबिक़, इसराइल चाहता है कि सीरिया में ऐसे सैन्य बेस मौजूद न हों, जो ईरान तक उसकी पहुँच में बाधा डाल सकें. उनके शब्दों में, सीरियाई हवाई क्षेत्र इसराइल को "ईरान तक साफ़ नज़र रखने का रास्ता" उपलब्ध कराता है.''

नेतन्याहू की 'गिरफ़्तारी' को लेकर तुर्की ने क्या कहा

नेतन्याहू
इमेज कैप्शन, तुर्की उन मुस्लिम बहुत देशों में है, जिसने इसराइल को सबसे पहले मान्यता दी थी

तुर्की ने कहा है कि वो ग़ज़ा तक मानवीय सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं पर हुए हमले से जुड़े एक घरेलू आपराधिक मामले में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की गिरफ़्तारी के लिए इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करने का अनुरोध करेगा.

इंटरपोल रेड नोटिस जारी कर दुनिया भर की क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों से किसी व्यक्ति को तलाशने, प्रत्यर्पण या किसी अन्य क़ानूनी कार्रवाई तक उसे अस्थायी रूप से गिरफ़्तार करने का अनुरोध करता है.

इंटरपोल सदस्य देशों की ओर से भेजे गए अनुरोधों की समीक्षा करता है और उसके बाद रेड नोटिस जारी करने का फैसला करता है.

तुर्की के क़ानून मंत्री अकिन गुरलेक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''नेतन्याहू और एक अन्य अभियुक्त के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वॉरंट जारी किए गए हैं. इन पर जनसंहार, मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और यातना देने समेत कई आरोप लगाए गए हैं. यह मामला अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इसराइल की ओर से 35 लोगों को निशाना बनाने से जुड़ा है.''

टॉम बराक

मई में इसराइली सेना ग़ज़ा की ओर जा रहे ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला (बेड़ा) के कम से कम दो जहाजों पर गोलीबारी की थी. यह बेड़ा ग़ज़ा में मानवीय सहायता पहुंचाने की एक और कोशिश कर रहा था.

इससे पहले भी इसराइल ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ऐसे सहायता मिशनों को रोक दिया था.

इसराइली अख़बार हारेत्ज़ ने कहा है कि कई रिपोर्टों के मुताबिक़, इसराइली सेना की ओर से रोके गए इस फ़्लोटिला में 70 से ज़्यादा तुर्की नागरिक शामिल थे.

अख़बार के मुताबिक़ तुर्की के क़ानून मंत्री ने कहा कि ग़ज़ा में इसराइल को उसके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराने के लिए तुर्की सभी क़ानूनी ज़रियों का इस्तेमाल करेगा.

तुर्की के इस क़दम का मक़सद तुर्की के अलावा दूसरे देशों के अधिकारियों को भी नेतन्याहू को गिरफ़्तार करने के लिए प्रोत्साहित करना है.

हालांकि, इंटरपोल अगर रेड नोटिस जारी भी करता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि किसी देश के लिए नेतन्याहू को गिरफ़्तार करना अनिवार्य हो जाएगा.

तुर्की
इमेज कैप्शन, प्रदर्शनकारी एक जनवरी, 2025 को इस्तांबुल के गलाटा ब्रिज पर फ़लस्तीनियों के समर्थन में आयोजित रैली में एक पोस्टर के साथ फ़लस्तीन और तुर्की के झंडे लेकर शामिल हुए थे

तुर्की की इस पहल पर नेतन्याहू के कार्यालय ने तुर्की और उसके राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन की कड़ी निंदा की.

इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "अर्दोआन एक यहूदी-विरोधी तानाशाह हैं, जिन्होंने कुर्दों का जनसंहार किया है, हमास के आतंकवादियों को पनाह दी और, साइप्रस के आधे हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लिया. उन्होंने अपने विरोधी पत्रकारों और राजनेताओं को रिकॉर्ड संख्या में जेल में डाला है."

बयान में कहा गया कि अर्दोआन "इसराइल के ख़िलाफ़ अपनी आक्रामकता को सीरिया तक बढ़ाने" की कोशिश कर रहे हैं लेकिन इसराइल 'इसे बर्दाश्त नहीं करेगा.'

नवंबर 2025 में तुर्की ने जनसंहार और मानवता के ख़िलाफ़ अपराध के आरोपों में इसराइल के 37 सीनियर अधिकारियों के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वॉरंट जारी किए थे.

इनमें नेतन्याहू, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर, रक्षा मंत्री इसरायल काट्ज, इसरायली सेना के प्रमुख एयाल ज़मीर और नौसेना कमांडर डेविड सलामा शामिल थे.

तुर्की के कानून मंत्रालय ने गिरफ़्तारी वॉरंट की सूची में शामिल बाक़ी 32 इसराइली नागरिकों के नाम नहीं बताए थे, लेकिन कहा था कि वे भी वरिष्ठ अधिकारी हैं. अगर ये सभी 37 अधिकारी तुर्की आते हैं तो उन्हें गिरफ़्तार किया जा सकता है.

सीरियाई बेस पर इसराइली हमलों के बाद तनाव और बढ़ा

सीरिया
इमेज कैप्शन, सीरिया का अबू अल-दुहूर मिलिट्री बेस जिस पर दिसंबर 2024 में असद विरोधियों ने कब्जा कर लिया था. (फ़ाइल फ़ोटो)

इस बीच, मंगलवार को सीरियाई बेस पर इसराइली हमलों के बाद तुर्की और इसराइल के बीच तनाव और खुलकर सामने आ गया.

इस सप्ताह की शुरुआत में इसराइल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया में अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हमला किया था. यह हमला कथित तौर पर तुर्की के एक प्रतिनिधिमंडल के वहां दौरे के कुछ ही समय बाद हुआ.

इसराइल ने कहा था कि सीरिया उसके साथ मौजूदा सुरक्षा समझौतों का उल्लंघन करने के क़रीब पहुंच रहा था, क्योंकि वह तुर्की की सेना को वहाँ अपनी मौजूदगी स्थापित करने की अनुमति दे रहा था.

बुधवार को नेतन्याहू ने कहा कि इसरायल ने तुर्की को चेतावनी दी थी कि वह सीरिया में तुर्की की सैन्य मौजूदगी बढ़ने को बर्दाश्त नहीं करेगा.

उन्होंने कहा कि इसराइल ने तुर्की को "स्पष्ट कर दिया था" कि वह ऐसी मौजूदगी का विरोध करता है.

ऐसा माना जा रहा है कि उनका इशारा उन्हीं हमलों की ओर था, जिनकी ज़िम्मेदारी किसी इसराइली अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर नहीं ली है.

सीरिया एक अरब देश है, जिसकी सीमा दोनों देशों से लगती है. 2024 में बशर अल-असद को सत्ता से हटाए जाने के बाद राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के सहयोगी के रूप में सीरिया में तुर्की के बढ़ते प्रभाव ने इसराइल की चिंता बढ़ा दी है.

नेटो सदस्य तुर्की की सीरिया के साथ करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा है. सीरिया में 13 साल चले गृहयुद्ध में तुर्की एक प्रमुख पक्ष था. उसने असद विरोधी विद्रोहियों का समर्थन किया और कुर्द समूहों को रोकने के लिए कई बार सीरिया में अपने सैनिक भेजे.

तुर्की इन कुर्द समूहों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा मानता है.

इसराइल का कहना है कि उसे सीरिया के नए शासकों की चरमपंथी पृष्ठभूमि को लेकर चिंता है. उसका यह भी कहना है कि वह सीरिया में अल्पसंख्यक द्रूज़ समुदाय की रक्षा करना चाहता है, जिसके अनुयायी इसराइल में भी हैं.

सीरिया को लेकर इसराइल की सुरक्षा संबंधी चिंताएं वहां 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ मौजूदा जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू चुनाव हार सकते हैं. 2023 में हमास के नेतृत्व में हुए हमलों के बाद उनकी सुरक्षा के मुद्दे पर पकड़ और साख अभी भी कमज़ोर है.

इसराइल और तुर्की के इस तनाव पर क्या कह रहे हैं विश्लेषक

बिन्यामिन नेतन्याहू और रेचेप तैयप्प अर्दोआन
इमेज कैप्शन, बिन्यामिन नेतन्याहू और रेचेप तैयप्प अर्दोआन 2023 में संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन से इतर बातचीत करते हुए

तुर्की और इसराइल के बीच फिर बढ़ते तनाव को लेकर मध्य-पूर्व पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों ने टिप्पणी की है.

सीरिया, ईरान, कुर्दिश मामलों जानकार और जियोपॉलिटिकल विश्लेषक माइकल अरिज़ांती ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''नेतन्याहू तुर्की के साथ तनाव बढ़ा रहे हैं. इसराइल में चुनाव से पहले के आने वाले महीने ख़तरनाक हो सकते हैं.''

''तुर्की को इस जाल में नहीं फँसना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि वह फँसेगा. अर्दोआन के लिए भी संयम ज़रूरी है.''

मध्य पूर्व के मामलों के विश्लेषक अब्दुलसलाम सालेह ने इसराइल और तुर्की के तनाव को लेकर एक्स पर लिखा, '' नेतन्याहू इतने उग्र क्यों हो रहे हैं. क्योंकि उनकी आंखों के सामने सामान्य संबंध बनाने की पहल और अब्राहम समझौते ख़त्म होते जा रहे हैं. नेतन्याहू आज सिर्फ़ इसलिए नहीं चिल्ला रहे हैं कि सीरिया में तुर्की की मौजूदगी बढ़ रही है. बल्कि इसलिए कि उन्हें एहसास हो रहा है कि उनका बड़ा प्रोजेक्ट ख़त्म हो चुका है.''

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.