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भाव्या रंजन बिना कोचिंग ट्यूशन कैसे बनीं 12वीं सीबीएसई की नेशनल टॉपर
- Author, मोहम्मद सरताज आलम
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
- ........से, रांची
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
रांची की रहने वाली भाव्या रंजन सीबीएसई की बारहवीं बोर्ड परीक्षा में 99.8% प्रतिशत अंक हासिल कर नेशनल टॉपर बनी हैं.
यह परीक्षा इस वर्ष 17 फ़रवरी से नौ अप्रैल तक चली थी जिसका परिणाम 13 मई की शाम घोषित हुआ.
इस परीक्षा में शामिल 17,68,968 स्टूडेंट्स में भाव्या रंजन आर्ट्स की एकमात्र छात्रा हैं, जिन्हें 500 में कुल 499 अंक प्राप्त हुए हैं.
ख़ास बात यह है कि उन्होंने इंग्लिश, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस और पेंटिंग जैसे विषयों में 100 में 100 अंक हासिल किए हैं.
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भाव्या के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन पर रांची के विद्यालय 'ऑक्सफ़ोर्ड पब्लिक स्कूल' की एकेडमिक डायरेक्टर डॉक्टर सिमी मेहता का मानना है कि भाव्या की यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और शिक्षक-अभिभावक के मार्गदर्शन पर अमल का नतीजा है.
डॉक्टर सिमी मेहता ने बीबीसी से कहा, "परीक्षा परिणाम देखने के बाद हम सभी पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि भाव्या रंजन का राष्ट्रीय स्तर पर टॉपर बनना तय है. बीते दो साल में भाव्या के निखरते प्रदर्शन को देखकर हम सभी इसी परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे थे."
लेकिन भाव्या को खुद के नेशनल टॉपर बनने की उम्मीद नहीं थी. वह कहती हैं, "अच्छे परिणाम के साथ स्टेट टॉपर बनने का आभास था, लेकिन नेशनल टॉपर बन जाऊंगी इसकी उम्मीद नहीं थी."
भाव्या रंजन की मां विक्की गांधी को भी उनकी ये सफलता अप्रत्याशित लगी.
'हम स्टेट टॉपर बनने की उम्मीद कर रहे थे'
विक्की गांधी भाव्या रंजन के विद्यालय 'ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल' के जूनियर विंग की इंचार्ज हैं.
वह कहती हैं, "जब मुझे मालूम हुआ कि भाव्या ने 500 में 499 अंक हासिल किए हैं, मेरी आंखों में आंसू आ गए."
उस लम्हे उन्हें बिल्कुल आभास नहीं था कि भाव्या नेशनल टॉपर बन गई हैं.
लेकिन जैसे-जैसे लोगों तक जानकारी पहुंची, स्कूल के शिक्षक से लेकर रिश्तेदारों ने फ़ोन कर के भाव्या के नेशनल टॉपर बनने की उन्हें बधाई देनी शुरू की.
विक्की गांधी कहती हैं, "ये बिल्कुल सरप्राइजिंग था, कहां स्टेट टॉपर बनने की उम्मीद कर रहे थे और कहां भाव्या नेशनल टॉपर बन गई थीं."
मां विक्की गांधी की तरह भाव्या के पिता राजीव रंजन की आंखों में बेटी की सफलता की ख़ुशी साफ़ पढ़ी जा सकती थी.
बीबीसी से वह उत्साह से भरे लहज़े में कहते हैं, "हम खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. मेरे दोनों बच्चों की सफलता ने हमारी अगली पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख दी है."
भाव्या और उनके भाई भविष्य रंजन दोनों ही ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल में पढ़ रहे थे.
2026 की परीक्षा में जहां भाव्या रंजन ने 99.8% अंक हासिल किए, वहीं भविष्य रंजन को 92.4% अंक प्राप्त हुए.
भविष्य रंजन अपनी जुड़वां बहन के अंकों से ख़ासे उत्साहित हैं.
वह कहते हैं, "हम दोनों ने नर्सरी से अभी तक की पढ़ाई एक साथ एक ही स्कूल की एक ही कक्षा में की है. मेरी बहन मुझसे कहीं ज़्यादा मेधावी है, उसकी कड़ी मेहनत ने उसको नेशनल टॉपर बनाया है."
पिता राजीव रंजन का मानना है कि उनके दोनों बच्चों ने अनुशासन में रह कर परीक्षा की तैयारी कड़ी मेहनत से की इसी का परिणाम है कि दोनों को इतने अच्छे नंबर मिले.
कोचिंग और ट्यूशन का सहारा नहीं लिया
राजीव रंजन के दोनों बच्चों ने केजी से 12वीं तक कभी ट्यूशन या कोचिंग का सहारा नहीं लिया.
वह कहते हैं, "दोनों बच्चों का फ़ोकस हमेशा कंसेप्ट पर रहा है. इसलिए उन्होंने कभी किसी भी विषय की रटते हुए तैयारी नहीं की."
पिता रवि रंजन की इस बात से भाव्या रंजन सहमति जताती हैं.
10वीं में भाव्या के 96.8% अंक आने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा. जिसका सकारात्मक परिणाम 11वीं की पढ़ाई शुरू होने के बाद दिखना शुरू हुआ.
रवि रंजन कहते हैं, "हाईस्कूल में उम्दा अंक प्राप्त होने के बाद भाव्या ने अपनी पढ़ाई में पहले की तुलना में कहीं अधिक निरंतरता दिखानी शुरू की."
पिता से सहमत भाव्या मानती हैं कि उन्होंने स्कूल नियमित रूप से अटेंड किए, तो विद्यालय की गतिविधियों में सक्रियता से भाग भी लेती रहीं.
उस दौरान उन्होंने अपने स्कूल की हेड गर्ल के तौर पर भी पहचान बनाई.
भाव्या के अनुसार, वह घर आने के बाद स्कूल में पढ़ाया गया सारा पाठ नियमित रूप से दोहरातीं थीं. उसके बाद पाठ से संबंधित पिछले वर्षों में पूछे गए सवालों को हल करतीं.
भाव्या कहती हैं, "मैंने सैंपल पेपर के अलावा प्रीवियस ईयर के सवालों को नियमित रूप से हल करने का अभ्यास पूरे अनुशासन के साथ साल भर किया."
नियमित रूप से अनुशासित पढ़ाई करने में मिली कामयाबी का श्रेय भाव्या अपनी मां के अलावा पिता और भाई को देती हैं.
भाव्या ने क्या कहा?
वह कहती हैं, "मां खुद शिक्षक हैं इसलिए वह बेहतर तरीके से समझती थीं कि नियमित पढ़ाई कितनी ज़रूरी है और उसको कैसे हम दोनों भाई-बहन के अभ्यास में लाया जाए."
वह आगे कहती हैं, "मां ने वह सारी तकनीक लगाई जो हम दोनों भाई-बहन की पढ़ाई के लिए ज़रूरी थी, और यही हमारी सफलता का कारण बनी."
इस मुक़ाम को हासिल करने के लिए आप कितने घंटे पढ़ाई करती थीं?
इस सवाल पर भाव्या कहती हैं, "स्कूल के बाद चार से पांच घंटे डेली पढ़ती रही हूं. लेकिन मेरे लिए कितने घंटे पढ़ना कभी महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि समय का पढ़ाई के लिए सही इस्तेमाल हो मेरे लिए ये कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण था. इसी अनुशासन को मैने हाईस्कूल से इंटर तक की अपनी पढ़ाई के दौरान लागू किया."
10वीं व 12वीं की पढ़ाई में क्या अंतर दिखा?
भाव्या को 10वीं की तुलना में 12वीं की पढ़ाई ज़्यादा आसान लगी.
वह कहती हैं, "जहां 10वीं में विषयों की संख्या अधिक थी तो वहीं 12वीं की पढ़ाई के लिए जो विषय हमने चुने थे वे बहुत हद तक करियर ओरिएंटेड थे. ऐसे में अपने इंटरेस्ट वाले विषय को 12वीं के अलावा भविष्य के अपने तय लक्ष्य के लिए पढ़ने में ज़्यादा आसानी होती गई."
सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य
भाव्या रंजन भविष्य में अपने तय लक्ष्य के तहत सिविल सेवा से संबंधित परीक्षाओं को पास करते हुए देश की सेवा करना चाहती हैं.
भाव्या रंजन के पिता राजीव रंजन बताते हैं कि 10वीं के परीक्षा परिणाम को देख कर उन्होंने समझाया कि भाव्या आप इंजीनियरिंग या मेडिकल की लाइन में जाओ.
वह कहते हैं, "लेकिन भाव्या ने पहले से ही सिविल सेवा में जाने का मन बना लिया था. ऐसे में उन्होंने साइंस के बजाए आर्ट्स को चुना."
पिता की बात से सहमत भाव्या का मानना है कि अगर वह साइंस का चयन करतीं तो अपना प्रिय विषय बायोलॉजी ही चुनतीं और डॉक्टर बनतीं.
भव्या कहती हैं, "10वीं में अच्छे अंक आने के बावजूद मैंने आर्ट्स चुनते हुए तय किए लक्ष्य के तहत सिविल सेवा परीक्षा देने का संकल्प लिया."
फ़िलहाल सीयूईटी की परीक्षा की तैयारी में जुटीं भाव्या का इरादा भविष्य में दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक करने का है.
वह कहती हैं, "दिल्ली में रह कर स्नातक करने का एक लाभ ये भी है कि सिविल सेवा की तैयारी समय के साथ बेहतर हो सकेगी."
सोशल मीडिया से दूरी
आपने अपने लक्ष्य की तरफ़ बढ़ने के लिए और क्या-क्या कदम उठाए हैं?
इस सवाल पर भाव्या मुस्कुराते हुए कहती हैं कि मां के हर निर्देश का पालन पूरे अनुशासन से किया जो उन्होंने कदम-कदम पर दिए.
भाव्या की मां कहती हैं, "अगर मैं बोलूंगी कि मैंने भाव्या को सोशल मीडिया से दूर रखा है, तो शायद कोई इस पर विश्वास न करे, लेकिन यह सच है."
विक्की गांधी बताती हैं, "मैंने बच्चों को मोबाइल, लैपटॉप जैसे सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स समय की ज़रूरत के अनुसार दिए. लेकिन हमेशा नज़र रखती थी कि वे इसका इस्तेमाल किन किन चीज़ों में कर रहे हैं."
वह कहती हैं, "आज भी आप इनके मोबाइल और लैपटॉप को चेक करेंगे तो उसमें गेम या सोशल मीडिया एप्लिकेशन नहीं मिलेगी, सिवाय पढ़ाई के मटेरियल के."
मां की इस बात पर भाव्या का मानना है कि नवीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के दौरान उम्र के इस पड़ाव में गेम व सोशल मीडिया के प्रति ध्यान आकर्षित होता है, जो पढ़ाई से ध्यान भटकने का सबसे बड़ा कारण बनता है.
वह कहती हैं, "हर उस स्टूडेंट को जो पढ़ लिखकर कुछ बनना चाहते हैं उन्हें इस उम्र में हर उन चीज़ों से दूरी बनानी चाहिए जो पढ़ाई के प्रति उनके कंसंट्रेशन को भंग कर सकता है."
हालिया नीट पेपर लीक को लेकर भाव्या चिंतित दिखीं. पेपर लीक को सबसे बड़ा ड्रॉबैक मानने वालीं भाव्या कहती हैं, "मुझे नीट नहीं देनी, मेरी कई फ्रेंड्स ने नीट के लिए जी जान से मेहनत की. अब पेपर लीक की वजह से नीट की परीक्षा उन्हें दोबारा देनी पड़ेगी."
"कोई भी पेपर लीक होने से बच्चों पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है, ऐसे में मेरी फ्रेंड्स बहुत डिमोटिवेट हो गई लगती हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.